शहजाद पूनावाला ने पंजाब में कानून व्यवस्था पर जताई गंभीर चिंता, कहा स्थिति भगवान भरोसे है

नई दिल्ली, 5 जनवरी। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने अमृतसर में आम आदमी पार्टी के एक सरपंच की दिनदहाड़े बेरहमी से हत्या के बाद पंजाब सरकार पर कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब की कानून व्यवस्था अब पूरी तरह से भगवान भरोसे हो गई है।

नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान पूनावाला ने कहा कि जिस बेरहमी से यह हत्या हुई है, वह पंजाब में कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को बयां करता है। हमलावर बिना पुलिस के डर के खुलेआम सामने आए और उन्होंने अपने चेहरे भी नहीं छिपाए। यह साफ संकेत है कि राज्य में कानून का राज खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल सत्ता में पूर्ण रूप से व्यस्त हैं, जबकि पंजाब में लगातार सुरक्षा की घटनाएं हो रही हैं। कभी सिद्धू मूसेवाला की हत्या होती है, तो कभी अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी या सरपंच की हत्या। इसके अलावा तलवारबाजी और नशा कारोबार खुलेआम जारी है, लेकिन कार्रवाई नहीं होती। पंजाब में ग्रेनेड हमलों की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद से ही पंजाब में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान एक वीवीआईपी सीएम बन गए हैं और पुलिस को अपनी सुरक्षा के लिए ही तैनात रखते हैं।

शहजाद पूनावाला ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि रेवंत रेड्डी प्यार और संविधान का सम्मान करने का दावा करते हैं, लेकिन वास्तव में उनकी पार्टी धमकियों और नफरत की राजनीति कर रही है। वे बार-बार पत्रकारों और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते हैं, जो उनकी मानसिकता को दर्शाता है। राहुल गांधी के भी आपत्तिजनक बयानों का उन्होंने जिक्र किया।

उन्होंने यह भी कहा कि आज की कांग्रेस गांधीवादी नहीं बल्कि गाली देने वाली कांग्रेस बन चुकी है। पूनावाला ने कांग्रेस से सवाल किया कि लोकतंत्र के मंदिर में रेवंत रेड्डी द्वारा की गई भाषा पर उनका क्या रुख होगा, क्योंकि जनता इसका जवाब जानना चाहती है।

भाजपा प्रवक्ता ने कर्नाटक की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हिंदू समुदाय के लोग बिना किसी उकसावे के शांतिपूर्ण जुलूस निकालते हैं, लेकिन उन्हें हमलों का सामना करना पड़ता है, यहां तक कि बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में भी। ऐसे हमलों में कई लोग घायल हुए हैं, और यह पहली बार नहीं है। चरमपंथियों का मनोबल बढ़ा है, और गणेश विसर्जन समेत कई धार्मिक आयोजनों के दौरान हिंदू जुलूसों पर हमले होते रहे हैं। दुख की बात यह है कि सरकार इस पर कार्रवाई करने के बजाय बचाव में आ जाती है।

डीकेएम/डीकेपी

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